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लिंग खड़ा  क्यों और कैसे होता है , ling khada kyu ho jata hai, बहुत से नौजवान अक्सर इस बात से हैरान हो जाते है की ,मन में कामवासना जागृत होते ही लिंग खड़ा क्यों हो जाता है , कोइ अश्लील दृश्य देखने पर, या किसी लड़की को चलते हुए , हस्ते हुए देखने पर भी लिंग खड़ा हो जाता है ,क्यों क्यू क्युँ   अगर आपके मन में भी ऐसे सवाल आते है तो .आज आपको लिंग से जुडी सारी मनोविज्ञानिक केर्यस का जवाब मिल जायेगा .
दोस्तों मानव शरीर कुदरत का ऐसा नायाब तोहफा है ,जिसको सम्भाल कर रखना बहुत जरुरी है हमारे शरीर में लाखो करोड़ों , नस नाड़ियां , कई प्रकार के रस  जिसे हॉर्मोन्स भी कहते है , का निर्माण अपने आप होता रहता है .
हर एक हॉर्मोन शरीर के अलग अलग अंग को कण्ट्रोल में करता है , और यही हॉर्मोन शरीर के अंगो की कार्य प्रणाली को सही तरीके से कराने    में सहायक होते है .,

,इन्ही हॉर्मोन्स में से एक हॉर्मोन का नाम है टेस्टोस्टेरोन  ,ये हॉर्मोन ख़ास तोर पर पुरुषों में होता है , 13  साल की उम्र के बाद ,शरीर में इस हॉर्मोन का निर्माण तेजी से होने लगता है , इस हॉर्मोन का कार्य अंडकोष में नए वीर्य का निर्माण करना भी होता है और  लिंग में खून की उचित मात्रा को भेजने का कार्य भी यही हॉर्मोन करता है .
 जब भी पुरुष के मन में किसी लड़की स्त्री का विचार कामवासना के रूप में आता है तो .  दिमाग को सिग्नल मिल जाता है . हमारा दिमाग उसी समय टेस्टोस्टेरोन हॉर्मोन को शरीर में छोड़ने लगता है ,और ये हॉर्मोन पुरे शरीर में खून को तेजी से दौड़ाने  लगता है , जिस से कई बार संभोग के समय या किसी लड़की से बात करते समय , या रोमांस करते समय दिल की धड़कन बड़ जाती है , किस करने से भी यही हॉर्मोन शरीर में बढ़ने लगता है  उसी कारन  कई बार दिल की धड़कन इतनी तेज हो जाती है . जिसे आप सुन भी सकते है .

लिंग की बनावट  कैसी  होती  है :- 
पुरुष लिंग में सिर्फ तीन प्रकार की स्किन होती है , अर्थात तीन परते होती हैं ,

1 ) ग्लान्स हेड :- इसी को सुपारी भी कहते है ,देसी बोलचाल में इसे टोपा या टोपी भी कहते है ,लिंग के इस भाग में बहुत नरम  नाजुक त्वचा होती है ,जिसे छूने से झनझनाहट महसूस होती है ,उत्तेजना के समय ग्लान्स हेड का रंग गुलाबी या लाल हो जाता है ,  लिंग का यही भाग स्त्रिओं को सम्भोग के दौरान आनंद की अनुभूति करवाता है , 

2 ) - कॉर्पस कैवर्नोसम : - ये लिंग का सबसे मुख्य भाग है , उत्तेजना के समय इसी भाग में खून भर जाता है और लिंग कड़ा हो जाता  है , पुरुष का लिंग कितना बड़ा होगा और कितना मोटा लम्बा होगा कॉर्पस कैवर्नोसम से तय होता है , ये दो भागो में बटा होता है ,इसमें बहुत सारे  खाली छिद्र होते है   सम्भोग करते समय या मन में सेक्स का विचार आते ही खून तेजी से कॉर्पस कैवर्नोसम की और दौड़ने लगता है , और लिंग एक दम लोहे जैसे कठोर हो जाता है , 


3 ) - कॉर्पस स्पंजियोसियम : - लिंग तीसरा और आखरी भाग है कॉर्पस स्पंजियोसियम , चाहे जितनी भी उत्तेजना लिंग में आ जाये लेकिन लिंग के निचे का भाग स्पंज की तरह नरम और स्पंजी रहता है कारन ये मूत्र नलिका होती है , 

 , एक बात आपको और बता दे की , उत्तेजना के समय खून का फ्लो लिंग की और अधिक होता है , और जब तक खून लिंग में रहेगा , लिंग उत्तेजित ही रहेगा , लेकिन एक सामनाये  पुरुष का लिंग एक दिन में ढाई    घंटे से ज्यादा उत्तेजित नहीं रहना चाहिए , अन्यथा शरीर में और लिंग में कई प्रकार के विकार आ सकते है , जैसे की शुक्राणुओं की कमी या शुक्राणुओं का मृत हो जाना , और अस्थायी   नपुंसकता . जैसे लक्षण भी देखने को मिल सकते है .


सम्भोग या रोमांस , के समय ,मन में काम वासना जागृत होते ही लिंग उत्तेजित कैसे होता  है ये आपको इस आर्टिकल से पता चल गया है ,अगर आपको इस आर्टिकल से सम्बंधित को सवाल है तो कमेंट कर के पूछ लें धन्यबाद 

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